बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर: EC का फैसला वैध, कहा- RPA कानून के अनुरूप है प्रक्रिया

Supreme Court Endorses Bihar SIR: EC's Decision Valid; States Process Complies with RPA

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (27 मई 2026) को बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को बरकरार रखते हुए कहा कि यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) और 1960 के नियमों के अनुरूप है।

अदालत ने साफ कहा कि केवल प्रक्रियात्मक नियमों का पूरी तरह पालन न होने के आधार पर SIR को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।

सुप्रीम Court के अनुसार, चुनाव आयोग (EC) का SIR कराने का फैसला उसके वैधानिक अधिकार क्षेत्र के भीतर है और इसका उद्देश्य स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।

नागरिकता जांच पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

शीर्ष अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में नाम शामिल करने के सीमित उद्देश्य से नागरिकता की जांच कर सकता है।

हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाना उसकी नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा। ऐसे मामलों को चुनाव आयोग केंद्र सरकार की सक्षम प्राधिकरण के पास नागरिकता कानून के तहत अंतिम निर्णय के लिए भेज सकता है।

SIR प्रक्रिया न्यायिक समीक्षा के दायरे में

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR जांच न्यायिक समीक्षा के अधीन रहेगी।

अगर कोई मतदाता जरूरी दस्तावेज पेश नहीं कर पाता है, तो चुनाव आयोग कानून के तहत उसका नाम मतदाता सूची से हटाने का अधिकार रखता है।

दस्तावेज सत्यापन में “संतुलित दृष्टिकोण” जरूरी

अदालत ने कहा कि SIR में दस्तावेज सत्यापन की व्यवस्था एक संरचित प्रणाली का हिस्सा है, लेकिन इसमें “संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण” अपनाना जरूरी है।

बिहार SIR सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के लिए हस्तक्षेप भी किया था। अदालत के सुझाव पर आधार कार्ड को पहचान और निवास प्रमाण के तौर पर स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों की सूची में शामिल किया गया।

“SIR प्रक्रिया अत्यधिक नहीं”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया “स्पष्ट रूप से अत्यधिक” नहीं थी।

अदालत के मुताबिक, इसमें अपनाए गए सुरक्षा उपाय स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा के अनुरूप हैं। साथ ही, SIR कराने से मतदाताओं पर स्वतः प्रमाण का बोझ नहीं डाला जाता।

बिहार के बाद चुनाव आयोग ने बदले कुछ नियम

इस बीच, चुनाव आयोग ने बिहार SIR से मिले अनुभवों के आधार पर आगामी 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होने वाली SIR प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए हैं।

आयोग ने कहा कि अब एन्यूमरेशन चरण में मतदाताओं से दस्तावेज एकत्र नहीं किए जाएंगे, क्योंकि बिहार में अधिकांश लोगों का रिकॉर्ड पहले की मतदाता सूचियों में उपलब्ध पाया गया।

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